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शिक्षक सूचनाओं को सीधे पाने लिए ज्वाइन करें शिक्षक समूह
प्राथमिक शिक्षक भर्ती में बीएड डिग्री विवाद के संबंध में लेटेस्ट अपडेट
Page Updated On : 19 May 2022
बीएड डिग्री धारकों की तरफ से भानु यादव जी मोर्चा संभाले हुए हैं।
परिषदीय प्राथमिक स्कूलों से बीएड डिग्रीधारियों को बाहर करने के मामले में सबकी निगाहें अब राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) पर टिकी हुई हैं।
प्रतीक मिश्र व चार अन्य की ओर से दायर याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को स्थगन आदेश बढ़ाते हुए एनसीटीई को 14 जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा है। राज्य सरकार का कहना है कि एनसीटीई की ओर से निर्धारित योग्यता और निर्देशानुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का आयोजन कराया जाता है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 25 नवंबर 2021 के अपने आदेश में एनसीटीई की 28 जून 2018 की अधिसूचना को रद्द कर दिया था। जिसके खिलाफ स्पेशल अपील सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
राजस्थान हाईकोर्ट के 25 नवंबर 2021 के आदेश के अनुपालन में एनसीटीई ने अब तक कोई संशोधित अधिसूचना/आदेश जारी नहीं किया है। एनसीटीई के शैक्षिक योग्यता के संबंध में कोई अधिसूचना जारी करने के बाद ही यूपी-टीईटी के लिए निर्धारित शैक्षिक अर्हता में नियमानुसार कार्रवाई संभव है।
एनसीटीई की ओर से 28 जून 2018 को जारी अधिसूचना के अनुसार टीईटी 2021 के लिए 15 मार्च 2021 को जारी शासनादेश में बीएड प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए अर्ह माना गया है।
एनसीटीई की ओर से प्रकाशित राजपत्र में कहा गया है कि प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती में 50 फीसदी अंकों के साथ स्नातक और बीएड की डिग्री को भी अर्हता मानी जाएगी। हालांकि शिक्षक बनने के बाद ऐसे प्रतिभागियों को दो वर्ष के भीतर एनसीटीई से मान्यता प्राप्त किसी संस्था से प्राइमरी शिक्षक के लिए छह माह का 6 महीने का ब्रिज कोर्स करना होगा।
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